आज के समय में अगर हम भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों की बात करें तो परमाणु ऊर्जा का क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है ! लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत ने परमाणु युग में कब प्रवेश किया और देश का पहला परमाणु रिएक्टर कब और कहां स्थापित हुआ था ? अगर मैं आपको बताऊं कि यह एशिया का पहला परमाणु रिएक्टर था और किसने इसे बनाया – तो बस 5 मिनट का समय दें और इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें !
भारत का पहला परमाणु रिएक्टर – अप्सरा
भारत ने परमाणु युग में 4 अगस्त 1956 को प्रवेश किया जब देश के पहले परमाणु रिएक्टर ‘अप्सरा’ का शुभारंभ किया गया ! यह रिएक्टर मुंबई के ट्रॉम्बे में स्थापित किया गया था जिसे आज भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के नाम से जाना जाता है ! सबसे बड़ी बात यह है कि अप्सरा न सिर्फ भारत का बल्कि पूरे एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर था !
4 अगस्त 1956 को दोपहर 3:45 बजे जब अप्सरा रिएक्टर चालू हुआ तो इसने भारत और एशिया के लिए परमाणु युग की शुरुआत कर दी ! बाद में 20 जनवरी 1957 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया ! यह भारत की वैज्ञानिक क्षमता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम था !
अप्सरा नाम कैसे पड़ा ?
अब आप सोच रहे होंगे कि इसका नाम अप्सरा क्यों रखा गया ? तो इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है ! जब रिएक्टर शुरू हुआ तो इससे खूबसूरत नीली किरणें निकलीं जो देखने में बेहद आकर्षक थीं ! इन नीली किरणों को देखकर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसका नाम ‘अप्सरा’ रख दिया क्योंकि यह किरणें अप्सराओं की तरह सुंदर लग रही थीं !
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भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक – डॉ. होमी जे भाभा
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे एक महान वैज्ञानिक का दिमाग था – डॉ. होमी जहांगीर भाभा ! उन्हें भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक कहा जाता है क्योंकि उनके नेतृत्व और विज़न के बिना यह संभव नहीं था ! 1950 के दशक की शुरुआत में डॉ. भाभा ने कहा था कि “अनुसंधान रिएक्टर परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ की हड्डी होते हैं” और इसी सोच के साथ उन्होंने अप्सरा रिएक्टर को डिजाइन किया !
1955 में डॉ. भाभा ने अप्सरा का डिजाइन तैयार किया और जुलाई 1955 तक इसे फाइनल कर दिया गया ! उनकी इच्छा थी कि रिएक्टर का निर्माण पूरी तरह से भारत में हो और केवल ईंधन का आयात किया जाए ! यह उनकी आत्मनिर्भरता की सोच का परिणाम था !
अप्सरा रिएक्टर की खास बातें
अप्सरा एक लाइट वाटर रिएक्टर था जो स्विमिंग पूल के आकार का था और इसकी मदद से अधिकतम 1 मेगावाट थर्मल बिजली का उत्पादन किया जा सकता था ! इसमें एल्युमिनियम-यूरेनियम की मिश्र धातु से तैयार प्लेटों का इस्तेमाल करके ऊर्जा पैदा की जाती थी ! रिएक्टर की डिजाइन भारत ने खुद तैयार की थी लेकिन इसके लिए परमाणु ईंधन की आपूर्ति एक खास समझौते के तहत ब्रिटेन से की गई थी !
सबसे दिलचस्प बात यह है कि रिएक्टर के कंपोनेंट्स का निर्माण मुंबई की विभिन्न इकाइयों ने किया था जैसे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), चिंचपोकली और मझगांव डॉक्स में न्यू स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग कंपनी ! यह पूरी तरह से स्वदेशी प्रयास था !
अप्सरा का योगदान और उसके बाद
अप्सरा रिएक्टर ने पांच दशक से अधिक समय तक शोधकर्ताओं को समर्पित सेवा प्रदान की ! इस रिएक्टर की मदद से रेडियो आइसोटोप का उत्पादन किया जाता था जो चिकित्सा और अन्य क्षेत्रों में इस्तेमाल होते थे ! 2009 में इस रिएक्टर को बंद कर दिया गया क्योंकि यह पुराना हो चुका था !
लेकिन भारत ने यहीं नहीं रुका ! 10 सितंबर 2018 को शाम 6:41 बजे ट्रॉम्बे में ‘अप्सरा-उन्नत’ नाम से एक नया और उन्नत रिएक्टर शुरू किया गया जो स्वदेशी तकनीक से बनाया गया था ! यह उच्च क्षमता वाला रिएक्टर भी स्विमिंग पूल के आकार का है और इसमें स्वदेशी रूप से विकसित कम समृद्ध यूरेनियम का इस्तेमाल किया जाता है !
क्यों जरूरी था परमाणु ऊर्जा का विकास ?
1950 के दशक में जब भारत स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में था तब ऊर्जा संकट एक बड़ी समस्या थी ! औद्योगिकीकरण की ओर बढ़ते देश को बिजली की जरूरत थी लेकिन संसाधन सीमित थे ! ऐसे में डॉ. होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में भारत ने परमाणु ऊर्जा को एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में चुना !
अप्रैल 1948 में संसद से एटॉमिक एनर्जी एक्ट पास हुआ और डॉ. भाभा को भारत के परमाणु कार्यक्रम का निदेशक बनाया गया ! इसी एक्ट के तहत इंडियन एटॉमिक एनर्जी कमीशन का भी गठन किया गया ! यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला कदम था !
पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र कब बना ?
अब अगर आप सोच रहे हैं कि भारत में बिजली उत्पादन के लिए पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र कब बना तो वह अप्सरा के बाद आया ! परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने का काम अक्टूबर 1969 में उस समय शुरू हुआ जब महाराष्ट्र के तारापुर में दो रिएक्टरों को सेवा में लाया गया ! तारापुर परमाणु बिजली स्टेशन का निर्माण अमेरिका के जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा किया गया था और इसकी प्रारंभिक बिजली क्षमता 210 मेगावाट थी !
अप्सरा को म्यूजियम बनाने की योजना
सबसे रोमांचक बात यह है कि सरकार अब अप्सरा रिएक्टर को एक म्यूजियम में बदलने पर काम कर रही है ! यह दुनिया में अपनी तरह की पहली परियोजना हो सकती है जहां एक परमाणु रिएक्टर सेंटर को जनता के लिए म्यूजियम में परिवर्तित किया जा रहा है ! इस म्यूजियम में वह स्थान भी दिखाया जाएगा जहां होमी भाभा रिएक्टर में बैठते थे और पुराने BARC प्रशिक्षण स्कूल को भी प्रदर्शित किया जाएगा !
अंतिम शब्द
4 अगस्त 1956 को स्थापित अप्सरा रिएक्टर केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं थी बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक था ! डॉ. होमी जहांगीर भाभा के नेतृत्व में शुरू हुई इस यात्रा ने भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक शक्तिशाली देश बना दिया ! आज भारत में कई परमाणु रिएक्टर काम कर रहे हैं और हम ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे हैं !
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