आज के समय में अगर आप उच्च शिक्षा से जुड़े किसी भी क्षेत्र में हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो आपने जरूर UGC यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का नाम सुना होगा ! लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी स्थापना कब हुई थी और संसद के एक्ट से इसे कब वैधानिक संगठन बनाया गया ? अगर मैं आपको बताऊं कि UGC की स्थापना की कहानी काफी दिलचस्प है और इसमें दो महत्वपूर्ण तारीखें हैं – तो बस 5 मिनट का समय दें और इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें !
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना कब हुई ?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि UGC की स्थापना आखिर कब हुई ? तो आपको बता दूं कि इसके पीछे दो महत्वपूर्ण तारीखें हैं जिन्हें समझना जरूरी है ! पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अनौपचारिक गठन 28 दिसंबर 1953 को हुआ था जब तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इसका उद्घाटन किया था ! लेकिन यह सिर्फ एक शुरुआत थी और उस समय यह एक वैधानिक संगठन नहीं था !
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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को औपचारिक रूप से संसद के एक्ट के माध्यम से नवंबर 1956 में वैधानिक संगठन के रूप में स्थापित किया गया ! यह अधिनियम 3 नवंबर 1956 को लागू हुआ और तभी से UGC भारत सरकार का एक स्वायत्त वैधानिक संगठन बन गया ! तो अगर आपसे परीक्षा में पूछा जाए कि संसद के एक्ट से UGC की स्थापना कब हुई तो सही जवाब है – 1956 !
UGC की स्थापना क्यों की गई थी ?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर UGC की जरूरत क्यों पड़ी ? तो मैं आपको बताता हूं कि आजादी के बाद भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी ! विभिन्न विश्वविद्यालयों में शिक्षा के मानक अलग-अलग थे और उन्हें वित्तीय सहायता देने की कोई व्यवस्थित प्रणाली नहीं थी ! 1948 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की स्थापना की गई थी जिसने सिफारिश की कि एक विश्वविद्यालय अनुदान समिति का गठन किया जाए !
1952 में केंद्र सरकार ने निर्णय लिया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता के सभी मामलों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अधीन लाया जाएगा ! इसी के तहत 28 दिसंबर 1953 को मौलाना अबुल कलाम आजाद ने औपचारिक तौर पर UGC का उद्घाटन किया ! लेकिन जैसा कि मैंने पहले बताया, इसे संसद के अधिनियम द्वारा वैधानिक दर्जा 1956 में ही मिला !
UGC Act 1956 क्या है ?
यूजीसी एक्ट 1956 वह कानून है जिसके तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भारत सरकार का वैधानिक संगठन बनाया गया ! यह अधिनियम भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था और 3 नवंबर 1956 को लागू हुआ ! इस एक्ट के तहत UGC को विश्वविद्यालयों में शिक्षण, परीक्षा और अनुसंधान के मानकों के समन्वय, निर्धारण और रख-रखाव की जिम्मेदारी दी गई !
सबसे बड़ी बात यह है कि इस अधिनियम के बाद ही UGC को पूर्ण अधिकार मिले कि वह विश्वविद्यालयों को मान्यता दे सके, उन्हें अनुदान दे सके और उच्च शिक्षा के मानकों को नियंत्रित कर सके ! आज भी यही UGC Act 1956 लागू है और इसी के तहत UGC अपना काम करता है !
UGC के मुख्य कार्य क्या हैं ?
अब बात करते हैं कि आखिर UGC करता क्या है ? तो मैं आपको बताता हूं कि इसके कई महत्वपूर्ण कार्य हैं –
विश्वविद्यालयों को मान्यता देना – UGC यह तय करता है कि कौन सा विश्वविद्यालय मान्यता प्राप्त है और कौन सा नहीं ! अगर किसी विश्वविद्यालय को UGC की मान्यता नहीं है तो उसकी डिग्री को सरकारी नौकरियों में मान्य नहीं माना जाता !
वित्तीय अनुदान प्रदान करना – जो विश्वविद्यालय और कॉलेज पात्र होते हैं उन्हें UGC की तरफ से वित्तीय सहायता दी जाती है जिससे वे अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बना सकें !
शिक्षा के मानक तय करना – UGC यह सुनिश्चित करता है कि सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षण, परीक्षा और अनुसंधान के मानक एक समान हों और गुणवत्ता बनी रहे !
UGC NET का आयोजन – यह राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) का आयोजन करता है जिसे पास करने के बाद ही कोई व्यक्ति विश्वविद्यालय या कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकता है या जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए पात्र हो सकता है !
सलाह और मार्गदर्शन – UGC केंद्र और राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा के विकास के लिए आवश्यक उपायों पर सलाह देता है !
UGC का मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय कहां हैं ?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और यह तीन स्थानों पर कार्यालय संचालित करता है – बहादुरशाह जफर मार्ग, 35 फिरोजशाह रोड और दिल्ली विश्वविद्यालय का दक्षिणी परिसर ! इसके अलावा UGC के 6 क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं जो पुणे, भोपाल, कोलकाता, हैदराबाद, गुवाहाटी और बेंगलुरु में स्थित हैं ! यह क्षेत्रीय कार्यालय अपने-अपने क्षेत्र के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की देखरेख करते हैं !
UGC की स्थापना से पहले क्या व्यवस्था थी ?
अब आप सोच रहे होंगे कि UGC से पहले क्या होता था ? तो मैं आपको बताता हूं कि UGC की स्थापना से पहले भी कुछ व्यवस्था थी लेकिन वह इतनी मजबूत नहीं थी ! 1944 में सार्जेंट रिपोर्ट के बाद पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान समिति के गठन की सिफारिश की गई थी ! 1945 में इसका गठन किया गया जो तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों – अलीगढ़, बनारस और दिल्ली – की देखरेख करती थी !
1925 में इंटर-यूनिवर्सिटी बोर्ड की भी स्थापना की गई थी जिसे बाद में भारतीय विश्वविद्यालय संघ के नाम से जाना गया ! यह संस्था विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक जानकारी के आदान-प्रदान का काम करती थी ! लेकिन एक मजबूत वैधानिक संगठन की जरूरत थी और इसलिए UGC Act 1956 के तहत UGC की स्थापना की गई !
UGC का महत्व आज के समय में
आज के समय में UGC भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है ! देश में सैकड़ों विश्वविद्यालय और हजारों कॉलेज हैं जो UGC की मान्यता के तहत काम कर रहे हैं ! अगर किसी संस्थान को UGC की मान्यता नहीं है तो उसकी डिग्री का कोई मूल्य नहीं होता और छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है !
UGC ने हाल के वर्षों में कई नई पहलें भी शुरू की हैं जैसे STRIDE (Scheme for Trans-disciplinary Research for India’s Developing Economy) जिसका उद्देश्य देश में अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देना है ! इसके अलावा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए एकीकृत संकाय भर्ती पोर्टल सीयू-चयन भी लॉन्च किया गया है !
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य UGC के बारे में
अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो ये तथ्य आपके लिए जानना जरूरी हैं –
- UGC का अनौपचारिक गठन – 28 दिसंबर 1953
- संसद के एक्ट द्वारा औपचारिक स्थापना – नवंबर 1956 (3 नवंबर 1956 को लागू)
- पहले शिक्षा मंत्री जिन्होंने UGC का उद्घाटन किया – मौलाना अबुल कलाम आजाद
- UGC के गठन की सिफारिश किसने की – डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1948 में)
- मुख्यालय – नई दिल्ली
- क्षेत्रीय कार्यालयों की संख्या – 6 (पुणे, भोपाल, कोलकाता, हैदराबाद, गुवाहाटी, बेंगलुरु)
- UGC NET का आयोजन – वर्ष में दो बार (जून और दिसंबर)
अंतिम शब्द
तो अब आप समझ गए होंगे कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना संसद के एक्ट से 1956 में हुई थी ! हालांकि इसका अनौपचारिक गठन 28 दिसंबर 1953 को मौलाना अबुल कलाम आजाद ने किया था, लेकिन वैधानिक दर्जा इसे UGC Act 1956 के तहत नवंबर 1956 में मिला ! यह भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित और विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आज भी देश के हजारों विश्वविद्यालय और कॉलेज इसकी मान्यता के तहत काम कर रहे हैं !
अगर आप किसी विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने जा रहे हैं तो पहले जरूर चेक करें कि वह UGC से मान्यता प्राप्त है या नहीं ! इससे आपकी डिग्री की वैल्यू बनी रहेगी और आपको भविष्य में कोई समस्या नहीं होगी ! अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें !